
चंबा। डिग्री कालेज चंबा में छात्राओं की संख्या 53 फीसदी से अधिक होने के बावजूद छात्राओं को छात्र संसद में प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिल पाएगा। छात्र संगठनों ने इस बार आरक्षण का प्रावधान न होने का फायदा उठाते हुए लड़कियों की पूरी तरह उपेक्षा की है। हालांकि जीत के लिए वे लड़कियों के आगे हाथ फैलाते दिख रहे हैं। पिछले तीन वर्षों की भांति इस बार भी छात्र संघ के चुनाव के पैनल में एनएसयूआई एवं एबीवीपी ने गर्ल्स को पैनल में जगह नहीं दी है। पहले एससीए चुनावों में लड़कियों के लिए आरक्षण होने के चलते छात्र संगठनों को मजबूरन छात्रा को चुनाव मैदान में उतारना पड़ता था। आरक्षण की शर्त न होने का छात्र संगठन भरपूर फायदा उठा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने महिलाओं को पंचायत चुनावों में आरक्षण प्रदान कर रखा है और इससे पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ गई है।
स्थानीय कालेज में कुल 2019 वोटर हैं। इसमें से 942 छात्र तथा 1077 छात्राएं हैं। मतलब 53 फीसदी से अधिक गर्ल्स वोटर हैं। तीनों संगठनों के कुल 12 प्रत्याशी एससीए के पदों पर कब्जा जमाने की फिराक में हैं। इनमें केवल एकमात्र लड़की चुनाव लड़ रही है। एसएफआई ने सहसचिव पद पर कुमारी प्रीति को चुनाव मैदान में उतारा है। एसएफआई ने पिछले साल भी दो लड़कियों को पैनल में जगह दी थी दोनों लड़कियां जीत हासिल नहीं कर पाई थी। पिछले साल भी लड़कियों की संख्या लड़कों की अपेक्षा अधिक थी।
छात्र नेताओं की माने तो लड़कियों की पैनल में हारने के डर से छात्र संगठन पैनल में जगह नहीं देते हैं। इस बारे में एनएसयूआई के परिसर अध्यक्ष ने बताया कि उनके संगठन के साथ काफी संख्या में लड़कियां है। सीआर और डीआर के पदों पर लड़कियां उतारी गई हैं। एसएफआई के परिसर अध्यक्ष नारायण और जिला सचिव विजय राठौर ने बताया कि एसएफआई हर वर्ष पैनल में लड़की को स्थान देती है। लड़कियों को पैनल में जगह दी जानी चाहिए। एबीवीपी के भुवनेश भारद्वाज का कहना है कि इकाई में कई महत्वपूर्ण पदों पर लड़कियों को स्थान दिया गया है।
